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अमावस्या का महत्व: सनातन हिंदू धर्म में अमावस्या का आध्यात्मिक रहस्य
By Shallu Sharma
2025-12-31

सनातन हिंदू धर्म में अमावस्या का गूढ़ रहस्य सूर्य और चंद्र के संयोग में छिपा है। यह तिथि आत्मचिंतन, तर्पण और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
अमावस्या का महत्व: सनातन हिंदू धर्म में अमावस्या का आध्यात्मिक रहस्य
सनातन हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष और गूढ़ महत्व धर्मशास्त्रों में बताया गया है। जब सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में एक साथ स्थित होते हैं, और उनके बीच का अंतर शून्य हो जाता है, तब अमावस्या का निर्माण होता है। यह काल सूर्य–चंद्र के पूर्ण संगम का प्रतीक माना जाता है।
अमावस्या का शास्त्रीय अर्थ
चंद्रमा की 16वीं कला को ‘अमा’ कहा गया है, जिसमें चंद्रमा की सभी 16 कलाओं की शक्ति समाहित मानी जाती है। इसी ‘अमा’ से अमावस्या शब्द की उत्पत्ति हुई है।
शास्त्रों में अमावस्या के अनेक नाम मिलते हैं जैसे –
अमावस्या, अमावासी, अमावसी, अमामासी, पंचदशी, सूर्य-चंद्र संगम आदि।
अमावस्या के दिन चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता, अर्थात् उसका न तो उदय दिखता है और न ही क्षय। इसी कारण इसे ‘कुहू अमावस्या’ भी कहा जाता है। यह काल आत्मचिंतन, तर्पण और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है।
अमावस्या प्रत्येक माह में केवल एक बार आती है। इस प्रकार एक वर्ष में कुल 12 अमावस्याएं होती हैं।
धर्मशास्त्रों के अनुसार अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना गया है।
प्रमुख अमावस्याएं और उनका महत्व
सनातन परंपरा में कुछ अमावस्याओं को विशेष फलदायी माना गया है:
1. सोमवती अमावस्या
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस दिन व्रत रखने से चंद्र दोष का निवारण होता है।
विशेष रूप से महिलाएं इस दिन पति की दीर्घायु और पारिवारिक सुख के लिए व्रत रखती हैं।
2. भौमवती अमावस्या
मंगलवार को आने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहा जाता है।
इस दिन व्रत रखने से ऋण, कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है।
धन-धान्य की कामना हेतु यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
3. मौनी अमावस्या
माघ मास में आने वाली मौनी अमावस्या का सनातन धर्म में अत्यधिक महत्व है।
इस दिन मौन व्रत, गंगा स्नान, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
4. शनि अमावस्या
शनिवार को आने वाली अमावस्या को शनि अमावस्या कहा जाता है।
इस दिन व्रत, दान और शनि शांति के उपाय करने से शनि दोष शांत होते हैं।
5. महालय अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या)
इसे पितृ पक्ष की अमावस्या भी कहा जाता है।
इस दिन तर्पण, श्राद्ध और अन्नदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और कुल में सुख-समृद्धि आती है।
6. हरियाली अमावस्या
श्रावण मास में आने वाली हरियाली अमावस्या भगवान शिव को समर्पित होती है।
इसे विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है:
- महाराष्ट्र में — गटारी अमावस्या
- तेलंगाना-आंध्र प्रदेश में — चुक्कला अमावस्या
- ओडिशा में — चितलागी अमावस्या
इस दिन वृक्षारोपण और पितृ शांति के विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
7. दिवाली अमावस्या
कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली अमावस्या कहा जाता है।
यह अमावस्या माता लक्ष्मी और माता काली से जुड़ी हुई है।
इसी दिन पूरे देश में दीपोत्सव (दीपावली) हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
8. कुशग्रहणी अमावस्या
इस अमावस्या को कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहा गया है।
इसे पिथौरा अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें देवी दुर्गा की पूजा का विधान है।
अन्य सभी अमावस्याएं भी स्नान, दान और आत्मशुद्धि के लिए महत्वपूर्ण होती हैं और प्रायः वे जिस वार को आती हैं, उसी के नाम से जानी जाती हैं।
अमावस्या के दिन रखी जाने वाली सावधानियां
धर्मग्रंथों के अनुसार अमावस्या के दिन सूक्ष्म और तामसिक शक्तियां अधिक सक्रिय मानी जाती हैं। इसलिए इस दिन विशेष सावधानी आवश्यक है:
- तामसिक भोजन, मदिरापान और नशे से दूर रहें।
- मानसिक और शारीरिक संयम बनाए रखें।
- अमावस्या और रविवार के दिन तिल के तेल का सेवन व अभ्यंग तथा स्त्री-सहवास निषिद्ध बताया गया है।
(संदर्भ: ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड 27.29–38)
अमावस्या का सरल उपाय (कर्ज निवारण हेतु)
यदि जीवन में कर्ज या आर्थिक दबाव बना हुआ है, तो
अमावस्या के अगले दिन से पूर्णिमा तक
प्रतिदिन रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य दें।
ऐसा करने से धीरे-धीरे आर्थिक स्थिरता और समृद्धि बढ़ती है।